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अहसास
(अनुराग शर्मा)
सब कुछ तो खो गया है, क्या पास रह गया है
तुम साथ हो, यह झूठा अहसास रह गया है
फिर से कभी मिलेंगे दिल तोड़कर गये जो
उम्मीद तो नहीं पर विश्वास रह गया है
उनका भी दोष क्या हम थे न उनके काबिल
यह सोचकर हमारा सब रंज बह गया है
हाथों से फिसले लम्हे, फिर किसको मिल सके हैं
जाती हवा का झोंका,चुपके से कह गया है.
© Anurag Sharma
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